यमुनोत्री  

 

 हिमालय की वादियों में बसे कई पवित्र हिन्दु तीर्थस्थल जिनमें से यमुनोत्री एक है। हिन्दु मान्यताओं के अनुसार चार धामों में से एक यमुनोत्री पावन नदी यमुना का उदगम स्थल है। यह अपने उष्ण और शीत झरनों के लिए जानी जाती है। हिन्दु धर्म यात्रा के लिए ये जगह अत्यंत पावन स्थलों में से एक है। प्राचीन काल में यह स्थान महान ऋषि अस्ति मुनि का निवास स्थल था। 

भौगोलिक स्थिति

 
 

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित यमुनोत्री समुद्रतल से 3293 मीटर ऊंचाई पर है। चारों ओर से हिमालय की पहाड़ियों से घिरा ये क्षेत्र भारत-चीन सीमा के अत्यंत करीब है। यमुनोत्री बंदरपूछ पर्वत के किनारे बहती है जो उत्तर में 6315 मीटर की ऊंचाई पर है। कालिंद प्रभात पर सप्तऋषि कुंड 4421 मीटर की ऊंचाई पर है जो पावन यमुना नदी का मुख्य स्त्रोत है। यमुनोत्री देहरादून से 278 किलोमीटर, ऋषिकेश से 236 किलोमीटर, चम्बा से 176 और सन्याचाटी से 21 किलोमीटर की दूरी पर है। गर्मियों में भी यहां का तापमान बहुत कम रहता है। यात्रियों को यहां आने के लिए गरम कपड़े व मोटे वस्त्रों के साथ आने की सलाह दी जाती है। गढ़वाल हिमालय के चार धामों में, पश्चिम की ओर स्थित यमुनोत्री प्रथम तीर्थस्थल है। जो देवी यमुना को समर्पित है बंदरपूछ पर्वत की चोटी से बहती यमुनोत्री, गंगोत्री के सामने स्थित है। चंपासार ग्लेशियर के एक किलोमीटर दूर यमुना नदी का उदगम स्थल यमुनोत्री 4421 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां पहुंचने का मार्ग बहुत कठिन है इसलिए बहुत कम श्रद्धालु इस तीर्थ स्थल का दर्शन कर पाते हैं। हिन्दु धर्म में इस स्थान का बहुत महत्व है। प्राचीन महान ऋषि अस्ति मुनि यहीं निवास करते थे। यमुनोत्री का प्रमुख आकर्षण यहां बहता गर्म पानी का झरना है। यहां आने वाले श्रद्धालु पहले इस गर्म पानी में चावल और आलु पका कर उसका प्रसाद तैयार करते हैं औऱ फिर उसका भोग लगाते हैं।  
यमुनोत्री का मार्ग कई घने जंगलो और पहाड़ियों से घिरा है। ऋषिकेष से 213 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है हनउत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित यमुनोत्री समुद्रतल से 3293 मीटर ऊंचाई पर है। चारों ओर से हिमालय की पहाड़ियों से घिरा ये क्षेत्र भारत-चीन सीमा के अत्यंत करीब है। यमुनोत्री बंदरपूछ पर्वत के किनारे बहती है जो उत्तर में 6315 मीटर की ऊंचाई पर है। कालिंद प्रभात पर सप्तऋषि कुंड 4421 मीटर की ऊंचाई पर है जो पावन यमुना नदी का मुख्य स्त्रोत है। यमुनोत्री देहरादून से 278 किलोमीटर, ऋषिकेश से 236 किलोमीटर, चम्बा से 176 और सन्याचाटी से 21 किलोमीटर की दूरी पर है। गर्मियों में भी यहां का तापमान बहुत कम रहता है। यात्रियों को यहां आने के लिए गरम कपड़े व मोटे वस्त्रों के साथ आने की सलाह दी जाती है। गढ़वाल हिमालय के चार धामों में, पश्चिम की ओर स्थित यमुनोत्री प्रथम तीर्थस्थल है। जो देवी यमुना को समर्पित है बंदरपूछ पर्वत की चोटी से बहती यमुनोत्री, गंगोत्री के सामने स्थित है। चंपासार ग्लेशियर के एक किलोमीटर दूर यमुना नदी का उदगम स्थल यमुनोत्री 4421 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां पहुंचने का मार्ग बहुत कठिन है इसलिए बहुत कम श्रद्धालु इस तीर्थ स्थल का दर्शन कर पाते हैं। हिन्दु धर्म में इस स्थान का बहुत महत्व है। प्राचीन महान ऋषि अस्ति मुनि यहीं निवास करते थे। यमुनोत्री का प्रमुख आकर्षण यहां बहता गर्म पानी का झरना है। यहां आने वाले श्रद्धालु पहले इस गर्म पानी में चावल और आलु पका कर उसका प्रसाद तैयार करते हैं औऱ फिर उसका भोग लगाते हैं।  
यमुनोत्री का मार्ग कई घने जंगलो और पहाड़ियों से घिरा है। ऋषिकेष से 213 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है हनुमानछत्ती। जहां से पैदल 13 किलोमीटर की यात्रा कर यमुनोत्री पहुंचा जाता है। यहां पालकी और कुलियों का भी प्रबंध है। 

प्रमुख दर्शनीय स्थल

  यमुनोत्री मंदिर यह मुख्य मंदिर यमुना देवी को समर्पित है। 19वीं सदी में यह मंदिर जयपुर की महारानी गुलेरिया ने बनवाया था। भूकंप से नष्ट होने के बाद इसका निर्माण दोबारा कराया गया था। यहां श्रद्धालु पवित्र जल में डुबकी लगाते हैं और गर्म जल में आलू औऱ चावल पका कर उसका भोग लगाते हैं।
  हनुमान छत्ती यमुना औऱ हनुमान गंगा का यह संगम श्रद्धालुओं के लिए काफी पवित्र माना गया है।· 
  दिव्य शिला यह एक पवित्र शिला है जिसके दर्शन यमुनोत्री मंदिर से पहले आवश्यक माना गया है।
   सान्याछत्ती यमुना नदी से यमुनोत्री को जाने वाला मार्ग जहां से अति मनोहारी दृश्य दिखाई देते हैं।
  चम्बा हिमालय की चोटियों का लुभावना चित्र दिखलाता यह स्थल 1,676 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
  सूर्यकुंड 190 डिग्री गर्म तापमान का जल सूर्यकुंड में बहता है। इसी जल में श्रद्दालु आलू और चावल पकाते हैं।

 
 

कैसे पहुंचे यमुनोत्री धाम

सड़क मार्ग
दहारासु से 107 किलोमीटर, तिहरी से 149 किलोमीटर, ऋषिकेश से 213 किलोमीटर और देहरादून से 172 किलोमीटर की दूरी पर यमुनोत्री है। 
रेलवे
ऋषिकेश से 213 किलोमीटर और देहरादून से 172 किलोमीटर 

हवाई यात्रा

देहरादून होते हुए यमुनोत्री तक 196 किलोमीटर