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मध्यमहेश्वर तुंगनाथ कपलेश्वर रुद्रनाथ
कपलेश्वर के अलावा अन्य तीन केदार मुख्य केदारनाथ से भी काफी ऊंचाई पर स्थित हैं जिसमें से रुद्रनाथ तक पहुंचने का मार्ग बाधाओं से भरपूर लेकिन गढ़वाल का सबसे सुन्दर स्थान माना जाता है।
शिव की भुजा तुंगनाथ में गिरी थी। तुंगनाथ मंदिर 3,680 मीटर की ऊंचाई पर है और पंच केदार में से सबसे ज्यादा ऊंचाई पर स्थित है। हांलांकि चोपटा से सबसे नज़दीक इस मंदिर का मार्ग अत्यंत सरल है। |
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रुद्रनाथ में शिव के चेहरे का पूजन किया जाता है। यह जगह 2,286 मीटर की ऊंचाई पर है और गोपेश्वर से 23 किलोमीटर दूर है। मंदिर से हाथी पर्वत, नंदा पर्वत, त्रिशुली का बहुत ही मनमोहक दृश्य मिलता है। यहां कई पवित्र कुंड भी मौजूद हैं जिनमें से सूर्यकुंड, चंद्रकुंड और तारा कुंड प्रमुख हैं। रुद्रनाथ की चढ़ाई से 3 किलोमीटर आगे अनुसूईया देवी का मंदिर स्थित है। |
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पुरातन काल में इस मंदिर की स्थापना पांडवो द्वारा की गई है ऐसा माना जाता है। किन्तु 8वीं सदी में आदिशंकराचार्य ने वर्तमान मंदिर परिसर की स्थापना की थी। मंदिर की भीतरी दीवारों पर कई देवी-देवताओं और धार्मिक मान्यताओं से जुड़े चित्र देखे जा सकते हैं। मंदिर के बाहर भगवान शिव के वाहन नंदी की एक विशाल प्रतिमा विराजमान है। भोलेनाथ को समर्पित यह मंदिर 1000 सालों से भी ज्यादा प्राचीन है। |
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| आदिगुरु शंकराचार्य समाधि - |
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केदारनाथ मंदिर के पीछे आदिगुरु शंकराचार्य का समाधि स्थल है। ऐसी मान्यता है कि केवल 32 वर्ष की आयु में चारों धामों की स्थापना कर शंकराचार्य ने यहां शरीर का त्याग किया था। |
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चोराबरी (गांधी सरोवर) (2 किलोमीटर)
एक छोटी सी झील है जहां से पांडवो के जेष्ठ भ्राता युधिष्ठिर ने स्वर्ग की ओर प्रस्थान किया था। झील में तैरती बर्फ का नजारा अत्यंत मनभावन है। |
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अलकनंदा नदी के किनारे का समतल स्थल ब्रह्मा कपल कहलाता है यहां हिन्दु अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए कामना करते हैं। |
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केदारनाथ के मुख्य यात्रा स्थल पर है यह गौरीकुंड जो मॉ गौरी को समर्पित है। |
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यह सोन गंगा और मंदाकिनी का संगम स्थल है यहीं से त्रियुंगीनारायण के लिए मार्ग खुलता है।
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त्रियुंगीनारायण
(25 किलोमीटर) -
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सोनप्रयाग से 5 किलोमीटर दूर इसी जगह भगवान शिव और पार्वती का विवाह हुआ था। मंदिर के सामने आज भी विवाह की अलौकिक ज्योति के दर्शन होते हैं। |
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गुप्तकाशी
(49 किलोमीटर) - |
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भगवान अर्धनारीश्वर और विश्वनाथ के दर्शन करने यहां श्रद्धालु यहां आते हैं। |