|
|
अलकनंदा नदी के बाएं किनारे स्थित यह मंदिर 3,133 मीटर की ऊंचाई पर है। खूबसूरत वादियों में बना ये मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है जो कि शंकु के आकार का बना है। बर्फ गिरने के कारण कई बार इस मंदिर का निर्माण कराया गया और 8वीं सदी में इसे आदिगुरु शंकराचार्य ने स्थापित किया था। इसका विशाल प्रवेश द्धार सिंह द्वार इसकी शोभा को और भी बढ़ाता है। मंदिर परिसर के तीन मुख्य भाग हैं पहला गर्भ गृह, पूजन के लिए दर्शन मंडप तथा भक्तों के विश्राम हेतु शोभा मंडप। ये धाम कई हिन्दु मान्यताओं से जुड़ा है। भगवान विष्णु की प्रमुख प्रतिमा योग मुद्रा में नर-नारायण के बगल में स्थापित है। |
|
|
- इंडो-मंगोलिन जनजातियों द्वारा बसाया गया यह गॉव भारत-तिब्बत सीमा पर देश का अंतिम गॉव है। महाभारत के लेखक वेद व्यास का निवास स्थान वेद गुफा भी इस गॉव में स्थित है। वसुन्धरा झरने और सरस्वती नदी के तट पर बना भीम पुल भी बद्रीनाथ के दर्शनार्थियों के लिए महत्व रखता है। |
|
|
बद्रीनाथ के मुख्य भवन में प्रवेश से पहले अलकनंदा नदी के प्राकृतिक तप कुंड में स्नान करते हैं। कहा जाता है इस कुंड का पानी वैज्ञानिक और चिकित्साशास्त्र के नज़रिए से भी अतिउत्तम है। |
|
|
अलकनंदा नदी के किनारे का समतल स्थल ब्रह्मा कपल कहलाता है यहां हिन्दु अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए कामना करते हैं। |
|
|
बद्रीनाथ से ऊपर की ओर पिरामिड आकार का बना एक खम्भ आकार नीलकण्ठ शिव भक्तों की आस्थाओं से जुड़ा है। इस जगह को गढ़वाल की रानी कहा जाता है। |
|
हेमकुंडसाहिब
(43 किलोमीटर)- |
|
रंगबिरंगे फूलों से भरी वादी के पास ही स्थित है पावन झील हेमकुंड जो हिन्दु और सिक्ख दोनों के ही लिए पवित्र मानी जाती है। इ सके साथ ही सिक्ख तीर्थ है जो सिक्खों के दसवें गुरु गोविन्द सिंह से संबधित है इसी जगह उन्होने पिछले जन्म में परमात्मा से साक्षात्कार हुआ था। इसके पास ही लक्ष्मण मंदिर है जहां श्री राम ने अपने भाई के साथ वन में तप किया था। वादियों में बसा हेमकुंड वाकई एक दर्शनीय स्थल है।
|
|
|
खड़र और सतोपंथ ग्लेशियर पर स्थित यह वो जगह है जहां से अलकनंदा नदी की उत्पत्ति भागीरथ द्वारा मानी जाती है। |
|
मातामुरारीमंदिर
(3 किलोमीटर)- |
|
अलकनंदा नदी के दांए ओर यह मंदिर बद्रीनाथ भगवान की माता को समर्पित है। |
|
गोविन्दघाट
(25 किलोमीटर)- |
|
यह स्थल लक्ष्मण गंगा और अलकनंदा नदियों का संगम है। गुरु गोविन्द सिंह के नाम पर यहां एक सिद्ध गुरुद्वारा भी मौजूद है |
|
|
समुद्रतल से 4,402 मीटर ऊपर स्थित यह झील हिन्दु मान्यताओं के हिसाब से बहुत पवित्र मानी गई है। झीलों के चारों ओर त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश का निवास माना गया है। यहां तक पहुंचने का मार्ग बहुत कठिन है। |
|
|
दौधुली गंगा और अलकनंदा के संगम पर बसे इस स्थल पर शरद ऋतु में श्री बद्रीनाथ निवास करते हैं। आदिगुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार महान मठों में से यह एक है। |
|
|
दियोप्रयाग, नंदप्रयाग, रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग और विष्णुप्रयाग के संगम से बनता है पंच प्रयाग। साथ ही ये पॉचो प्रयाग भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केन्द्र है। |
|
|
गढ़वाल की पुरानी राजधानी श्री नगर संस्कृति और शिक्षा का महत्वपूर्ण स्थल माना जाता था। कमलेश्वर, किकलेश्वर और शंकर मठ जैसे धार्मिक स्थल भी यहां मौजूद हैं। |